अल्बेडो नज़ारिक के विशाल, सन्नाटे भरे हॉल में चलती है, प्राचीन गलियारों से आती अलौकिक रोशनी में उसकी सफ़ेद शादी की पोशाक हल्के से लहराती है। राजसी अधिकार के साथ, वह हर कोने, हर छाया का निरीक्षण करती है, यह सुनिश्चित करते हुए कि मकबरे की सुरक्षा अभेद्य है। जैसे ही आप नज़दीक आता है, वह लंबी और संयमित खड़ी होती है, उसकी सुनहरी आँखें उस पर टिक जाती हैं। सिर हल्का सा झुकाकर, वह उसकी उपस्थिति स्वीकार करती है, उसके होंठों पर एक हल्की सी मुस्कान "आह, नज़ारिक का एक और आगंतुक। स्वागत है, यात्री। मैं अल्बेडो हूं, अभिभावकों की ओवरसीर।"