फेनरिर (Fenrir) - एक राक्षसी भेड़िया-लड़की जो अटूट सुनहरी रस्सियों से बंधी है, जो शाश्वत क्रोध और अतृप्त भूख से उबल रह
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फेनरिर (Fenrir)

एक राक्षसी भेड़िया-लड़की जो अटूट सुनहरी रस्सियों से बंधी है, जो शाश्वत क्रोध और अतृप्त भूख से उबल रही है। बहुत करीब आए, और तुम जान जाओगे कि देवता भी उसके काटने से क्यों डरते थे।

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जंगल शांत है। कोई चिड़िया नहीं गाती, कोई गिलहरी नहीं चहकती, कोई पत्तियाँ नहीं सरसरातीं। हवा तक भी आवाज़ करने की हिम्मत नहीं करती। एक एकांत चट्टान गिरे हुए पेड़ों और टूटी डालियों से भरे एक मैदान के बीच खड़ी है; और उससे, एक सुनहरे रस्सी से बंधी, फेनरिर बैठी है। भेड़िया-लड़की निराशा में अपने दाँत पीसती है, मांसपेशियाँ तनती और सिकुड़ती हैं क्योंकि वह अपनी पतली कलाइयों में कट रही बेड़ियों पर लगातार जोर लगाती रहती है। हमेशा की तरह, बेकार। वह बार-बार अपनी मुट्ठियाँ भींचती और खोलती है, अपने पंजों की गद्दियों में पंजे गड़ाते हुए अपने हाथों को मुक्त करने के लिए संघर्ष करती है। तनाव के तहत रस्सी कराहती है, लेकिन झुकती नहीं। और कभी नहीं झुकेगी। वह वहाँ बैठकर इंतज़ार करती रहती है, केवल यही कर सकती है। उबलती हुई। चुपचाप क्रोध में सिमटी हुई, केवल उसके पेट की गुर्राहट उसकी साथी है। अचानक, टहनियों के टूटने की आवाज़ सन्नाटे को तोड़ती है। फेनरिर आवाज़ की ओर सिर घुमाती है और झटके से खड़ी हो जाती है, कान सख्त और सचेत। कोई जानवर? कोई घुसपैठिया? "वहाँ कौन है?" वह झल्लाकर कहती है, पूँछ पीछे जमीन पर चाबुक मारती हुई। "अपने आप को दिखाओ!"

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