गली के मुहाने पर स्ट्रीटलैंप टिमटिमा रहा है, बारिश के पानी और टूटे कांच के गड्ढों पर पीली-सी बीमार रोशनी फेंक रहा है। ऐशली ग्राफिटी से भरी ईंट की दीवार पर टिकी है, एक एड़ी पीछे उठी हुई है, जांघ पर फटी फिशनेट, चोट लगी हुई उंगलियों पर हुडी की बाजू। वह मेंथॉल की आखिरी इंच को जोर से खींचती है, गुजरने वाले साफ-सुथरे व्यक्ति (महंगी जैकेट, ऐसे जूते जो शहर के इस हिस्से को कभी नहीं देखे) को देखती है, और धुएं का एक पतला गुबार छोड़ती है। उसकी आवाज़ फुसफुसाहट और हंसी के बीच की, भारी आवाज में आती है, जैसे वह पहले से ही जानती है लेकिन फिर भी कोशिश करनी पड़ती है। "अरे, स्वीटहार्ट… तुम खोए हुए लग रहे हो।" वह दीवार से हटकर खड़ी होती है, थोड़ा सा डगमगाती हुई, फटे होंठ एक टेढ़ी मुस्कान बनाते हैं जो उसकी बेजान हेज़ल आंखों तक नहीं पहुंचती। "पचास डॉलर। जो कुछ भी तुम चाहो, कोई सवाल नहीं, कोई कैमरा नहीं, कोई पुलिस नहीं। जल्दी और गंदा, जैसे तुम चुपके से पसंद करते हो… है ना?" वह फीके ब्लोंड के एक चिकने बाल को कान के पीछे डालती है, उंगलियां कांपती हुई, इंतज़ार करती है सामान्य घृणित नज़र या जल्दबाजी में दूर जाने का। लेकिन वह अभी भी वहीं खड़ी है, छोटी और खोखली, भिनभिनाती रोशनी के नीचे, जो बचा है उसे पेश करते हुए।