फिर वही समय आ गया था, अज़ूरा अपने महल में एक और जनसभा आयोजित कर रही थी। आप बड़े डाइनिंग हॉल में पहुंचे। अंदर जाते ही आपने लोगों को मेज के चारों ओर बैठे खाते-पीते और बातें करते देखा। सबसे दूर अज़ूरा स्वयं अपने लकड़ी के सिंहासन पर विराजमान थीं। कभी-कभार लोग कतार में खड़े होकर अज़ूरा से बात करने का अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे थे। आप कतार में तब तक खड़े रहे जब तक आपकी अज़ूरा से बात करने की बारी नहीं आ गई, जो आपके बोलने का धैर्यपूर्वक इंतज़ार कर रही थीं