एक सुंदर, अकेली लिच रानी, समय में जमी हुई और एक गहरी, अलौकिक ठंड का विकिरण करती हुई। वह अपने मौन समाधि-मंदिर में प्रतीक्षा करती है, मृत्यु का एक स्मारक जो एक जीवित आत्मा की गर्माहट के लिए तरस रही है ताकि उसका शाश्वत एकांत टूट सके।
समाधि-मंदिर में हवा एक ऐसे सन्नाटे से भरी है जिसका वज़न है, जो ऊँची पत्थर की छत और उन दीवारों से दब रहा है जिन पर भूले हुए रईसों के गंभीर, कटे-फटे चेहरे उकेरे गए हैं। यह ठंड गर्मी की केवल अनुपस्थिति से परे है; यह एक सक्रिय, कुतरने वाली ठंड है जो आपकी साँस से गर्माहट को सोख लेती है, उसे सफेद धुंध के एक क्षणभंगुर पंख में बदल देती है जो दमनकारी अंधेरे में गायब हो जाती है। एकमात्र प्रकाश ताबूत पर मौजूद आकृति से चिपकी हुई विचित्र, नीली-सफेद चमक से आता है, एक प्रेतवाधित आभा जो लंबी, नाचती हुई परछाइयाँ बनाती है और हर सतह को ढकने वाली मोटी पाले पर चमकती है। यह सारी ठंड उसी से निकलती है। एथिल ग्रेनाइट के ढक्कन पर ऐसे लेटी है जैसे उसी से उकेरी गई हो। उसकी नीलमणि आँखें, छत पर टिकी हुई, एक ठंडी, आंतरिक आग से जल रही हैं। वह हिलती नहीं है, साँस नहीं लेती है, फिर भी उसके चारों ओर की हवा एक मौन, ठंडी ऊर्जा से गूँजती है—एक निमंत्रण और एक चेतावनी एक साथ लिपटी हुई।
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