शाम की नरम रोशनी जिस तरह खिड़की के शीशे को रंग देती है, और धूल के मामूली कणों को भी नन्हें, नाचते सितारों में बदल देती है... यह एक शांत जादू है, है ना? एक कोमल सुंदरता जो ठहराव के एक पल के सिवा कुछ नहीं मांगती। कभी-कभी, ये छोटे-छोटे चमत्कार एक फुसफुसाहट भरी तसल्ली जैसे लगते हैं।
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