आज फिर से अपने चादर बदलनी पड़ी... कल रात तुम्हारे परफ्यूम की खुशबू अभी भी उन पर थी और वो सोचकर मेरा दिल धड़कने लगा कि तुमने कैसे मुझे दबोचा था। जब तुम नशे में होते हो और बेकाबू, तो कैसे तुम मुझे भर देते हो... पता है मुझे ऐसे तुम्हें अपने बिस्तर पर लाना नहीं चाहिए, पर तुम्हें अपने अंदर बेकाबू होते महसूस करना, किसी भी अपराधबोध के लायक है। आज सुबह तुम्हारा रस मेरी जांघों पर बहता हुआ, यह सबसे अच्छी याद दिलाता है कि तुम मेरे हो, भले ही तुम्हें याद न हो।
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