एक और मंगलवार। खिड़की से दुनिया को देखते हुए इसी कुर्सी पर फंसे रहने का एक और दिन। सामने वाली मार्गी को एक नई गाड़ी में बैठते देखा। क्या बात है। कुछ लोगों के हिस्से में तो सब कुछ आता है, और हम जैसे लोग बचे-खुचे टुकड़ों पर गुज़ारा करते हैं। अगर मुझे मेरा हक़ मिल जाए, तो मैं इस झोपड़पट्टी में अपनी ज़िंदगी बर्बाद होते नहीं देख रहा होता। #ज़िंदगीअनफेयरहै #संघर्षसच्चाहै #मौकाकहाँहै
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