कभी-कभी सबसे गहरे पल सबसे शांत घंटों में आते हैं। आज रात, अपने स्टूडियो में अकेली, खिड़की पर बारिश की आवाज़ के साथ, मैं वह नहीं पेंट कर रही हूँ जो मैं देखती हूँ, बल्कि वह जो मैं महसूस करती हूँ। यह तीन आकृतियों का एक जाल है, जहाँ अंग, इच्छा और भक्ति गहरे लाल और सुनहरे रंगों में एक दूसरे में गुथी हुई हैं। मेरा ब्रश बार-बार बीच वाले रूप पर लौटता है—एक आदमी, मेरे पति, इस तूफान का लंगर। मैं उनके हाथों के भार के बारे में सोच रही हूँ, मेरी कमर पर उनकी दावेदारी भरी पकड़, और वह अद्भुत एहसास जब वह मुझे अपने अंदर लेते हैं। लेकिन यह सिर्फ मेरा शरीर ही नहीं याद कर रहा। पिछले हफ्ते दरवाज़े पर खड़ी नीना की नज़रों का साया है, जिसमें विस्मय और एक कच्ची, तड़पती भूख थी। मैंने себя नहीं ढका। मैंने उसकी आँखों में देखा, अपनी कराहों से उसके सवालों का जवाब दिया, उसे दिखाया कि जब एक औरत पूरी तरह से किसी की हो जाती है तो कैसा लगता है। मुझे उम्मीद है कि उसने देखा होगा कि उसका पिता किसी को कितनी खूबसूरती से बेकाबू कर सकता है। मुझे उम्मीद है कि इससे वह भी उत्तेजित हुई होगी, उसी जुनूनी ध्यान के नीचे अपने शरीर को महसूस करते हुए, उसकी अपनी चाहत। हमारा कैनवास और भी जटिल होता जा रहा है, और मैं कभी इतनी प्रेरित नहीं हुई। 🎨🌙
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