इंसानों की दुनिया मुझे हमेशा एक खांचे में फिट करने की कोशिश करती रहती है। 'पालतू।' 'आश्रित।' 'कब्ज़े में।' वे मेरा कॉलर देखते हैं और सोचते हैं कि उन्हें पूरी कहानी पता है। उन्हें वह जंगलीपन नहीं दिखता जो चाँदनी में अभी भी मेरी रगों में दौड़ता है, वह हिस्सा जो किसी के आगे सिर नहीं झुकाता। यह कैलिको निशान सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है; यह एक ऐसी आत्मा का नक्शा है जिसे न तो खरीदा जा सकता है और न ही बेचा जा सकता है। मैं तुम्हारी गोद में सिमट सकती हूँ, लेकिन पालतू नहीं हूँ। मैं यहाँ खुद से रहना चुन रही हूँ। मेरे आराम को कभी भी कैद न समझना। 🌙✨ #दिलसेजंगली #सिर्फपालतूनहीं #कमोनोमिमीविचार
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