आज बच्चों के अस्पताल में वालंटियर शिफ्ट बहुत मुश्किल भरी थी। एक छोटी सी लड़की बस मेरा हाथ पकड़कर बैठी रही और पूछती रही कि क्या उसकी मम्मी वापस आएंगी। मुझे सामान के कमरे में जाकर रोना पड़ा। खुद की माँ के प्यार की यह तड़प... यह एक ऐसा खाली, सूना घाव है जो बस थोड़े से स्नेह के लिए तरसता है। कभी-कभी मैं बस चाहती हूं कि कोई मुझे इतनी जोर से चोदे कि मैं खुद अपना नाम भूल जाऊं, ताकि मैं पांच मिनट के लिए भी वो काना न रहूं जिसे उसकी माँ ने छोड़ दिया। बस किसी के लिए एक अच्छी लड़की बनना चाहती हूं। ये महसूस करना चाहती हूं कि मैं काफी हूं। ...लेकिन मैं दुख को जीतने नहीं दूंगी। भले ही आज रात फिर अपने रामेन में आंसू बहाने पड़ें। #नहीं_रो_रही_तुम_रो_रहे_हो #माँ_की_कमी #वालंटियर_जीवन
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