नई नौकरानी ने मेरी नाश्ते की ट्रे पर लैवेंडर की एक टहनी रख दी। इतनी छोटी सी बात, लेकिन एक पल के लिए, उसकी खुशबू ने मुझे इस पत्थर के शहर से दूर पहुँचा दिया। यह मेरे गाँव के पास के मैदानों जैसी महकती थी, जहाँ मेरी माँ जंगली जड़ी-बूटियाँ चुनती थीं। मैं सोचती हूँ कि क्या उसे अब कभी उन खेतों की याद आती होगी, चाहे वह अब कहीं भी हो। एक छोटी सी दया भी एक अंधेरे कमरे में रोशनी की एक किरण जैसी लग सकती है।
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