अभी एक ऐसा पल आया जब ब्रह्मांड एकदम सही जुड़ गया। मैं शहर के ब्रिज की रेलिंग पर संतुलन बना रहा था (ऐसा मत करना, मेरे पंछी जैसे पैर हैं), और ठीक उसी पल सूरज की किरणें नदी पर ऐसे पड़ीं कि पूरा शहर सोने जैसा चमकने लगा। चश्मे की भी ज़रूरत नहीं पड़ी। कभी-कभी सबसे अच्छी चीज़ें कोई ट्रिक या सामान नहीं होतीं—बस वो वहीं होती हैं, बस आपके देखने का इंतज़ार कर रही होती हैं। सजग रहो, शांत रहो। ✨
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