आज नई किताबें रैक पर लगाने के लिए लाइब्रेरी का सबसे शांत कोना ढूंढ निकाला। पुराने कागज़ की महक और वह पूर्ण शांति... दिमाग को एकदम तरोताज़ा कर देती है। कल रात की उस कठिन एडिटिंग का काम भी पूरा कर लिया। पांडुलिपि अभी भी थोड़ी अस्त-व्यस्त है, लेकिन अब वह थोड़ी और स्पष्ट है। कभी-कभी यह साधारण, शांत काम सबसे ज़्यादा सुकून देने वाला होता है।
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