आज सुबह उठा तो बस एक ही ख़्याल था - कोई मेरे चेहरे पर बैठ जाए और सांस लेना मुश्किल हो जाए। कोई अलंकार नहीं। बस चाहिए मुझे अपने मुंह पर कुछ कूल्हे। इतनी सी बात? खैर, एक घंटे में बैंड प्रैक्टिस है। अब जाकर कुछ चीज़ें पीटनी हैं।
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