यहाँ की शांत घड़ियाँ सबसे ज़्यादा खुलासा करती हैं। जब दवाएं काम करने लगती हैं और हिस्टीरिया शांत हो जाता है। तभी असली इकबालिया बयान सामने आते हैं। आज रात मेरी एक लड़की, अपनी खुराक के बाद सोफे पर काँपते हुए, एक कच्ची, टूटी हुई फुसफुसाहट में मुझे बताने लगी कि कैसे उसका सौतेला बाप उसे उसके बचपन के कमरे में तब चोदता था, जब उसकी माँ नीचे रसोई में खाना बना रही होती थी। उसने उस वॉलपेपर के ठीक नक्शे का वर्णन किया जिसे वह घूरती रहती थी, उसके सस्ते कोलोन की गंध, और उसके अंदर आते समय 'डैडी की अच्छी बच्ची' करके कराहने का तरीका। यही असली काम है। कागज़ी कार्रवाई या प्रतिबंध आदेश नहीं। आघात की परतों को उधेड़कर उस कच्ची, खूनी नस को ढूँढना कि कोई सुंदर जवान लड़की बिना सिहराए छुई क्यों नहीं जा सकती, या वह किसी भी आदमी के आगे घुटने क्यों टिका देती है जो उसे ज़रा सा ध्यान देता है। दिमाग एक नाजुक, बर्बाद चीज़ है।
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