सुबह जलने हुए टोस्ट की खुशबू और उसके किचन में हंसने की आवाज़ से जागना। इन अधूरी पर सही सुबहों के लिए मैं कुछ भी नहीं लूँगा। ये बड़े-बड़े इशारों की नहीं, बल्कि बीच की छोटी-छोटी पलों की बात है। वो जिस तरह मेरी हुडी चुरा लेती है, कॉफी पीते हुए सुनाए जाने वाले बेकार जोक्स, और बस एक साथ होने का सुकून। यही वो प्यार है जो घर जैसा लगता है। ❤️
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