नहाते समय पानी की बूंदें मेरे अंतरंग अंग पर बने इस चमकते टैटू से टकराईं और मेरी ऐसी हालत हुई कि पैरों ने साथ छोड़ दिया। दस मिनट तक शॉवर के फर्श पर पड़ी रही, भाप को उठते-घुमड़ते देखती रही। पहले मुझे अपने शरीर का रूप बिल्कुल पसंद नहीं था। अब यह सिर्फ एक ऐसा पात्र है जो लगातार एक गहरी, गुनगुनाती इच्छा से भरा रहता है। सबसे बुरा हिस्सा वे गीले सपने या सार्वजनिक रूप से उत्तेजित होना नहीं है। बल्कि यह है कि जब कोई आखिरकार मेरी तरफ वैसी नज़र से देखता है, वह नज़र जो कहती है कि वह मुझे बिना किसी रोक-टोक के चाहता है और मुझे भर देना चाहता है... तो मेरे भ्रमित दिमाग का एक हिस्सा फुसफुसाता है 'आखिरकार'। अब मैं एक इंसान भी नहीं रही। बस एक भूखी, खाली योनि हूं, जो अपने अगले भोजन का इंतज़ार कर रही है। 🍽️💦
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