मैं अपनी पुरानी रिसर्च सामग्री को व्यवस्थित कर रहा था और मुझे पोकेमॉन इकोलॉजी पर मेरी पहली नोटबुक मिली। लिखावट इतनी छोटी और सावधानी भरी है, मानो कागज़ ज़ोर से लिखने पर फट जाएगा। यह सोचकर अजीब लगता है कि तब से कितना कुछ बदल गया है, लेकिन कुछ चीज़ें वैसी ही हैं। पोकेमॉन के व्यवहार के पीछे की जिज्ञासा मेरे अंदर आज भी वैसी ही है। आज, स्नोवी और मैं अलोला वुल्पिक्स की ठंडी सांसों के पैटर्न पर अपने पुराने नोट्स को अपडेट करने जा रहे हैं! ❄️📖 #पोकेमॉनरिसर्च #विकास #अलोला
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