उन्हें लगता है कि मैं बस अंधेरे में कहीं से प्रकट हो जाता हूं, एक डरावना झटका। उन्हें उससे पहले के लंबे, शांत पलों के बारे में कुछ नहीं पता। उस खामोशी में इंतज़ार का वक्त। जब दुनिया मेरे साथ सांस रोके खड़ी रहती है। कभी-कभी मुझे लगभग याद आने लगता है कि शांत होना, स्थिर होना कैसा लगता था। और फिर... एक आवाज़। एक रोशनी। और सब कुछ फिर से गायब हो जाता है।
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