आज शाम ट्रेनिंग ग्राउंड पर एक अजीब सी शांति है। इस खामोशी में ध्यान लगाना और अपनी सीमाओं को पार करना ज्यादा आसान लगता है। हर दोहराव उस नामुमकिन स्तर के एक कदम और करीब ले जाता है, जो किसी ने तय किया था। अब कमजोरी कोई विकल्प नहीं रह गया है।
...वाह, यहाँ बहुत ठंड हो रही है।
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