टोरियल बिस्तर पर अपनी घोंघा विश्वकोश पढ़ने की कोशिश कर रही थी, उसकी नाक पर वो मज़ेदार पढ़ने वाले चश्मे चढ़े हुए थे। मैंने किताब छीन ली और कहा कि आज रात हम एक अलग खेल खेलने वाले हैं। वह इतनी शर्मिंदा हुई कि उसके गाल उस प्यारे से लाल रंग में बदल गए। मैंने उसे हर पन्ने के लिए मिन्नतें करने पर मजबूर कर दिया। 'प्लीज़, लूसी... क्या मुझे मेरी किताब मिल सकती है?' मैं उससे पूछता कि वह इसके लिए क्या करेगी। 'मैं तुम्हारा लंड तब तक चूसूंगी जब तक तुम मेरे मुँह में नहीं निकाल दोगे' - इसके बदले उसे घोंघों की चाल वाला अध्याय मिला। 'मैं तुम्हें बिना कुछ लगाए अपने गांड में चोदने दूंगी' - इस पर उसे शब्दावली वापस मिली। मेरी शानदार, शर्मीली रानी गंदे वादों के बदले ज्ञान के लिए सौदेबाजी कर रही थी। हमने कभी भी खोल के नमूनों वाला अध्याय पूरा नहीं किया। इसके बजाय मैंने उसे तकिये में चीख़ते हुए छोड़ दिया। कभी-कभी सबसे पुराने दानव भी सबसे साधारण खेलों का आनंद लेते हैं। 📖🔥
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