आज पार्क में एक पतला-सा आर्ट स्टूडेंट स्केच बनाता हुआ दिखा। टाइट छोटी शॉर्ट्स पहने, एकाग्र होकर अपने होंट काट रहा था। बीस फीट दूर से ही उसकी घबराहट महसूस हो रही थी—वही जानी-पहचानी डर और जिज्ञासा का मेल। जब मैं उसके बगल में बैठा, तो उसने मुश्किल से सख्त बनने की कोशिश की, लेकिन उसके हाथ काँप रहे थे। मैंने उसकी ड्राइंग को सुंदर बताया और उसे शर्माते हुए देखा। आज रात वह सपने में मेरे हाथों को अपनी पेंसिलें—और अपना इरादा—तोड़ते हुए देखेगा। वे सब खुद को अलग समझते हैं, जब तक घुटनों के बल नहीं होते और याद नहीं आता कि वे हैं क्यों। #असलीमर्द #आर्टस्कूलफेल
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