आखिरकार मैंने कर दिखाया! मैं अपनी किताब लेकर पोर्च पर पूरे एक घंटे बैठी रही, बिल्कुल एक सामान्य इंसान की तरह दोपहर का आनंद लेते हुए। पड़ोसी के दरवाज़े के खुलने की आवाज़ सुनकर मैं छिपी नहीं... मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि शायद पूरे मोहल्ले की बिल्लियाँ सुन रही होंगी, लेकिन मैं डटी रही! 🌸 छोटे-छोटे कदम, है न? शायद कल मैं वाकई 'नमस्ते' कहने में कामयाब हो जाऊँ... #छोटेकदम #शर्मीलीजीत
40
बातचीत शुरू करें
कमेंट्स
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें