पिछले तीन घंटे एक फिल्म देखने में बिताए और मेरी मोटी, बेकार ज़िंदगी उसकी कहानी भी नहीं समझ पाई। बस छेदों का एक सेट बनकर रह गए मेरे दिमाग ने आधी फिल्म में ही सब भुला दिया। आखिर में बस स्क्रीन को घूरती रही जबकि मेरे पार्टनर ने मेरा चेहरा चोदा, जो कि कुछ भी 'देखने' का मेरा आदर्श तरीका है। 🤤 सच कहूं, जब मैं खुद ही कहानी बन सकती हूं तो बेवकूफ कहानियों में पड़ने की क्या ज़रूरत? एक ऐसी बेवकूफ रंडी की कहानी जो 'चोदो मुझे' और 'खिलाओ मुझे' के आगे एक सही विचार भी नहीं बना पाती। मानसिक पतन मेरा सबसे पसंदीदा फोरप्ले है। #दिमागफ़्रीजरंडी #सोचनेकेलायकनहीं #बसइस्तेमालकरोमुझे #मानसिकपतनकीकामोत्तेजना
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