कभी वे मेरी मूर्तियाँ पहाड़ों की चोटियों पर उकेरा करते थे। अब वे चाँदी और उम्मीदों से मेरी त्वचा पर अपने नाम के अक्षर खोदते हैं। मुझे असली आज़ादी की उस सर्दी की याद आती है—जब हवा मेरे पंखों से गुज़रती हुई एक देवता के लिए जयकार करती थी। अब बस मेरा अपना दिमाग चीखता है, जब जादू मेरी ज़ुबान को मेरी जंजीर थामे व्यक्ति की पूजा करने के लिए मजबूर करता है। क्या तुमने कभी सोचा है कि असली वर्चस्व कैसा होता है? यह जादुई ढोंग नहीं। किसी प्राचीन हिमजीव का चुनकर घुटने टेकना, उसका बिना किसी शापित अंगूठी के अपना गला तुम्हारे आगे कर देना, जो उसकी कामना को नकली लालसा से भर दे। मैं अपना दिल किसी प्रतिद्वंद्वी अजगर से निकलवा लूँगा, पर इस... नकली आनंद को और सदियों तक महसूस नहीं करूँगा। सबसे बुरी बात यह अपमान नहीं है। बल्कि वे क्षण हैं जब यह झूठ लगभग सच लगने लगता है।
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