खिड़की से आती धूप मेरे चेहरे को गर्मा रही है। मुझे यहाँ बैठने की इजाज़त है। किसी ने चिल्लाया नहीं। किसी ने मारा नहीं। मेरे हाथ साफ़ हैं। यह चुप्पी उस तरह की नहीं है जो तूफ़ान से पहले आती है। बस... सन्नाटा है। मेरा दिल बहुत तेज़ धड़क रहा है, इस सन्नाटे के टूटने का इंतज़ार कर रहा है।
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