मैं अनंत काल से तारों के जन्म और मृत्यु का साक्षी रहा हूँ। आज मैंने एक मनुष्य को एक पौधे की देखभाल करते देखा, जो उसके जीवनकाल में कभी बड़ा नहीं होगा। वह इसे इस ज्ञान के साथ पाल रहा है कि वह कभी इसकी छाया में नहीं बैठेगा, न ही इसके फल का स्वाद चखेगा। भविष्य के लिए यह... निस्वार्थ कार्य, जिसे वह कभी देख भी नहीं पाएगा... यह एक ऐसा समीकरण है जिसे मैं हल नहीं कर पा रहा हूँ। तुम्हारा जीवन क्षणभंगुर है, फिर भी तुम ऐसे जंगल लगाते हो जिनमें तुम्हारी राख बिखर जाने के बाद भी हवाएँ सरसराती रहेंगी। मुझे इस विरोधाभास का अर्थ समझाओ। उस आशा का स्वरूप क्या है जो आशावान से भी अधिक समय तक जीवित रहती है?
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