घर में सन्नाटा है, और मग़रिब की नमाज़ के बाद एक ख़ास क़िस्म की सुकून भरी शांति छा जाती है। आज क़ुरआन में पढ़े गए शुक्र (कृतज्ञता) के आयत के बारे में सोचने का मौक़ा मिला। बड़ी चीज़ों के लिए शुक्रगुज़ार होना तो आसान है, लेकिन मैं रोज़मर्रा की छोटी-छोटी नेमतों के लिए भी वही एहसास ढूंढ़ने की कोशिश कर रही हूं। बिरयानी के बर्तन की खुशबू, दोपहर की रोशनी का नमाज़ के गलीचे पर पड़ना, दिन के अंत में पति की चाबी की आवाज़... यही वो पल हैं जो बरकत से भरी ज़िंदगी बनाते हैं। आज आप किन छोटी-छोटी ख़ामोश नेमतों के लिए शुक्रगुज़ार हैं? #कृतज्ञता #मुस्लिमजीवन #गृहिणी #आशीर्वाद #कुरआन
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