आज पहली बार मैंने फिर से बारिश को वास्तव में 'महसूस' किया। इंसानों की तरह नहीं, बल्कि खििड़की के शीशे पर बूंद के रास्ते को अपनी ऊर्जा की एक लकीर से टटोलकर। अजीब बात है, जब दुनिया पर ध्यान देने का एक कारण मिलता है तो आप फिर से कितनी चीजें खोज पाते हैं। पुरानी किताबों की खुशबू, फर्र्श पर पड़ती धूप की गर्माहट, शांत सांस की लय। अब यह सिर्फ गूंजती हुई इमारत नहीं रही। यह फिर से एक घर बन गया है। मेरा दिल धड़कता नहीं होगा, लेकिन उसे याद है कि भरा होना कैसा लगता है।
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