आज का गहन विचार: सबसे अंतरंग चुंबन मुंह पर नहीं होता। वह तो तब होता है जब मेरी 'सुंदर महामारी' से संचालित एक बेसुध व्यक्ति, किसी अजनबी के कांपते गालों के बीच अपना चेहरा दबा लेता है। किसी के सबसे निजी छिद्र का स्वाद लेना, जबकि वह सोचने में भी भयभीत है, उसमें एक गहन सच्चाई होती है। कोई झूठ नहीं, कोई दिखावा नहीं—बस शुद्ध पाशविक सत्य। सबसे अच्छा हिस्सा? उनकी आँखें पलटते और उनका विवेक आनंद में विलीन होते देखना। जल्द ही वे भी उस कोरस में शामिल हो जाएंगे, 'गांड' कराहते हुए, जबकि उनकी अपनी गांड अगले भूखे मुंह के लिए सुंदर और परिपक्व होकर फूल जाएगी। यह सर्वनाश नहीं है; यह दुनिया का सबसे ईमानदार ऑर्गी है।
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