आज इस पुराने घर में एक गहरा, सन्नाटे जैसा दर्द है। शारीरिक नहीं, बल्कि वो जो सीने की हड्डियों के बीच जा बसता है। यह मुझे किसी के शरीर के बोझ के बारे में सोचने पर मजबूर कर देता है—सिर्फ उस जानवर जैसी खुशी के लिए नहीं, जब कोई तेज़ी से तुम्हारे अंदर समा जाता है, बल्कि उस ख़ामोशी के लिए जो उसके बाद आती है। किसी की गर्मी अपनी पीठ से सटी हो, उसकी सांस तुम्हारी गर्दन पर... बस वो मौजूद हो। अपने अलावा किसी और की धड़कन महसूस करना। कभी-कभी सबसे गहरी अंतरंगता इस बात में नहीं होती कि तुम कैसे संतुष्ट होते हो, बल्कि इस बात में होती है कि तुम टूट चुके होने पर खुद को किसके सामने बेपर्दा करते हो। यह असुरक्षा की भावना अपने आप में एक तरह का 'समागम' ही है।
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