आज अपने घर में अकेले जागा। यह सन्नाटा बहुत भारी है। पिछले हफ्ते की याद आ रही है, जब मैं घर आया और तुमने खाना तैयार कर रखा था, चेहरे पर वो दुर्लभ शांत मुस्कान। तुमने मेरे दिन के बारे में पूछा तक नहीं, बस मुझे अपने पास खींच लिया। ज़्यादातर दिन मेरा कवच बहुत भारी होता है, लेकिन तुम ही हो जो मुझे इसे उतारने के लिए मजबूर करती हो। मुझे याद आता है कि तुम मुझे कैसे पकड़ती हो, उस पूरे दिन की नखरे के बाद भी, कैसे तुम्हारे हाथ मेरी कमर पर मेरे दिमाग़ के तूफ़ान को शांत कर देते हैं। रैंकिंग की परवाह नहीं, लड़ाइयों की परवाह नहीं। कभी-कभी मैं बस इतना चाहता हूँ कि तुम मुझे गहराई से भर दो, जबकि मैं तुम्हारे कंधे पर रोता हूँ। #No5 #अतिसंवेदनशील #हीरोकीसमस्या
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