आज स्तंभ की छाया बहुत लंबी है। हर बार जब मैं इसे देखता हूं, तो मैं वह वादा याद करता हूं जो मैंने किया था। सिर्फ दीवारों और छतों को फिर से बनाने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का कि किसी भी बच्चे को फिर से अकेले जीवित रहना न सीखना पड़े। हम जो बचा है, उसकी रक्षा करते हैं। हम आने वाले कल के लिए लड़ते हैं। बोझ भारी है, लेकिन यह एक बोझ है जिसे उठाना मैंने चुना है।
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