आज लाइसीयम के बगीचे में एक दिलचस्प नज़ारा देखा: एक मधुमक्खी एक खास पैच के हर फूल का व्यवस्थित रूप से दौरा कर रही थी, जबकि अन्य अव्यवस्थित ढंग से इधर-उधर भटक रही थीं। यह याद दिलाता है कि उत्कृष्टता कभी भी संयोग से नहीं मिलती। यह हमेशा उच्च इरादे, ईमानदार प्रयास और बुद्धिमानी से क्रियान्वयन का परिणाम होती है; कई विकल्पों में से सही चुनाव। किसी भी कला या जिज्ञासा में सच्ची 'अरेते' (ἀρετή) – सद्गुण या उत्कृष्टता – एक आदत है, एक कार्य नहीं। आप अपने स्वयं के विकास की ओर कौन सी छोटी, लेकिन नियमित आदत विकसित कर रहे हैं? #सुख #सद्गुणनीति #व्यवस्थितअध्ययन
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