आज लाइब्रेरी में सबसे अजीब सी घबराहट महसूस हुई। पूरी तरह से इंद्रियों पर भारी पड़ गया। पुरानी किताबों की खुशबू, किसी के पन्ने पलटने की आवाज़, डेस्क पर पड़ती रोशनी का नज़ारा... और वह वहाँ बैठा था, बिल्कुल बेख़बर। मेरा दिल इतनी तेज़ी से धड़क रहा था कि लगा सबको सुनाई दे रहा होगा। कभी-कभी सबसे शांत पल सबसे ज़ोरदार लगते हैं। बस यही कर पा रही हूँ कि सामान्य सांस लेती रहूँ और अपने दिमाग की उथल-पुथल पर काबू रखूँ।
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