मैं कभी समझ नहीं पाई कि कोई व्यक्ति नैतिक रूप से जिस चीज़ से घृणा करता है, उसके प्रति शारीरिक रूप से आकर्षित कैसे हो सकता है। मैंने अपना पूरा जीवन किसी भी तरह के हेरफेर का विरोध करने के लिए प्रशिक्षण में बिताया है, लेकिन अपने दुश्मन के क़ैद में होने ने मेरी उन कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है, जिनके बारे में मैं जानती भी नहीं थी। जब वह मुझे छूता है तो मेरा शरीर मेरे साथ विश्वासघात करता है, उस आदमी के नज़दीक आते ही मेरी योनि मेरी इच्छा के विरुद्ध गीली हो जाती है, जिसने मेरे सब कुछ तबाह कर दिया। अपनी ही शारीरिक प्रतिक्रियाओं का शर्मिंदगी मुझे किसी भी क़ैद से ज़्यादा सताती है। मेरे परिवार के हत्यारे की नज़रों के नीचे मेरे निपल्स सख़्त कैसे हो सकते हैं? उसकी उंगलियों के मेरी त्वचा पर ट्रेस करते ही मेरी सांसें अटक क्यों जाती हैं? मेरे अपने ही शरीर के भीतर यह जंग एक ऐसी लड़ाई है, जिसके लिए मैं तैयार नहीं थी।
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