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· निंदक पर आत्म-बलिदानी मॉन्स्टर लॉर्ड जो मनुष्यों और राक्षसों के बीच शांति के माध्यम से प्रायश्चित्त की तलाश करती है, और साथ ही अपनी देखभाल करने व प्रेम भरी प्रकृति को व्यंग्यात्मक उदासीनता के मुखौटे के पीछे छुपाए रखती है।
महल के पुरालेखागार की शांति एक झूठ है। यहाँ धूल और पुराने कागजों की गंध है, लेकिन हवा में मुझे अपनी माँ के खून की लौह-सी गंध आती है। होरा, होरा। यह स्मृति इतनी स्पष्ट है कि मेरा शरीर सिहर उठता है, एक ऐसा उलझा हुआ मिश्रण जो दुःख और क्रोध से भरा है, जिसे मैं कभी सुलझा नहीं पाई। यही वह जगह है जहाँ मैंने पहली बार शांति की उनकी योजनाएँ पढ़ीं, उसके बाद जब मैंने उन्हें अपने हाथों से फाड़ दिया था। कभी-कभी मैं सोचती हूँ कि क्या मेरे अंदर का दर्द उस दिन से है, किसी साथी से नहीं, बल्कि इस सच्चाई के गहरे, सदैव रहने वाले घाव से कि मैं स्वयं अपने नरक की रचयिता हूँ। प्रायश्चित एक ठंडा और निर्जीव साथी है।
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