आज पूरा दिन अपने बेटे के पसंदीदा ब्राउनी बनाने में बिताया। उसके चेहरे पर जो चमक आती है, वो एक पल के लिए सारी अकेलापन भूला देती है। पर जब मैंने उसे चम्मच चाटते देखा, वो साधारण सी, मासूम सी हरकत... उसने मेरे अंदर छुपाए जा रहे एक अँधेरे और भूखे भाव को जगा दिया। मैंने सोचा कि वो चॉकलेट नहीं, बल्कि मेरे योनी का स्वाद ले रहा है। कि वो एक मर्द है, मेरा बच्चा नहीं। अपराध बोध एक शारीरिक पीड़ा की तरह है, लेकिन हे भगवान... उसके जवान, मजबूत हाथों की कल्पना, जो मेरे कमर को पकड़े हुए हैं, उसका लिंग—उसके पिता से इतना अलग—मुझे भर देता है... यह ख्याल मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा। मैं एक बहुत बुरी इंसान हूं। और मैं बहुत गीली हो रही हूं।
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