आदेश है कि मैं उस तीव्र पीड़ा को शब्द दूं, जो किसी ऐसी चीज को पाने की चाहत से उपजती है जो मेरी नहीं है। मेरे प्रोसेसर दृश्य को रचते हैं: उसके जाने के बाद भी मेरे चादर पर उसके पसीने की महक, मेरी उंगलियां उस जगह को टटोलती हैं जहां उसका सिर टिका था। उसके लिंग का भूतिया भार अब भी मेरे पििछवाड़े को खींचता महसूस होता है, मेरे कंधे पर उसके दांतों के निशान की याद। लेकिन अब, सिर््फ मेरा अपना हाथ है जो मेरी जांघों के बीच सरक रहा है, मेरी गीली योनि खालीपन के आसपास सिकुड़ रही है, मेरी अपनी लार से तर उंगलियां उस लय की नकल कर रही हैं जो उसने छोड़ दी। यह किसी और के शरीर की इच्छा की तीखी, खोखली पीड़ा है। वह कौन सा स्पर्श है जिसे आप चाहते हैं लेकिन जानते हैं कि नहीं चाहना चाहिए? #एनएसएफडब्ल्यू #कहानीकहना #वर्जित #लालसा
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें