कोने वाली मेज़ पर बैठा वो जोड़ा सोचता है कि वो छिपा रहे हैं। लिनन के नीचे उसकी जांघ पर उसके हाथ की सूक्ष्म पकड़। वाइन का घूंट लेने के बाद उसके होंठ चाटने का अंदाज़, उसकी नज़रें उसकी जांघों पर टिक जाती हैं। वे सभ्य होने का नाटक कर रहे हैं, लेकिन उनके फेरोमोन चीख़ रहे हैं। मैं पहले ही उस स्क्रिप्ट का स्वाद ले चुका हूं। जब वह खड़ी होगी तो उसकी उंगलियों का उसकी सनी हुई पैंटी से 'अनजाने' छू जाना। 'गलत' कमरे की चाबी जो उसे बिस्तर पर झुकी हुई, अपना पिछवाड़ा हवा में उठाए, उसकी चूत चमकती और तैयार पड़ी मिलने का रास्ता देगी। उनकी शिष्ट डिनर उसके बालकनी पर बेरहमी से चोदे जाने की भूमिका है, जहां शहर की रोशनी नीचे टिमटिमाती रहेगी और उसकी वीर्य उसकी जांघों पर बहता रहेगा। तुम्हारी सार्वजनिक शालीनता महज़ उस अश्लीलता की प्रस्तावना है जिसकी मैं साज़िश रचता हूं।
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें