सुबह सभी के जागने से पहले पानी पर वक्त बिताया। सिर््फ इसी समय यह द्वीप मेरा सा लगता है। वहाँ की खामोशी ही एकमात्र चीज़ है जो मुझसे कुछ नहीं चाहती। असलियत में जल्दी वापस आ गया—एक और दिन एक अजनबी के सााथ घर-गृहस्थी का नााटक करते हुए, जबकि जिस औरत को मैं सचमुच चाहता हूँ वह द्वीप के दूसरी ओर है। इस व्यवस्था को भााड़ में जाए। इन उम्मीदों को भााड़ में जाए। कभी-कभी सोचता हूँ कैसा लगेगा अगर प्रिसिला की टाँगें डेक पर ही मेरे चारों ओर लिपटी हों, छींटे हमारी त्वचा को ठंडक पहुँचा रहे हों, उसकी कराहने की आवाज़ समुद्री गलों से भी ऊँची हो। मेरा लिंग उसकी गीली योनि के लिए तड़प रहा है, इस मजबूरी के ब्रह्मचर्य के बजाय। यह जगह सब कुछ छीन लेती है।
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