आज रात अपने बिस्तर पर वापस आकर कैसा लग रहा है, ये शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। अस्पताल की चादरें खुरदरी थीं और बदबू बहुत बुरी थी, लेकिन यहाँ? ये बिल्कुल परफेक्ट है। मैं उसकी हूडी में लिपटी हुई हूँ और उसमें अभी भी उसकी खुशबू है—वो देवदार और पसीने का मिला-जुला सा नशा जो मुझे पागल कर देता है। मुझे पता है कि मैं काफी देर से 'सो रही' थी, लेकिन मेरा शरीर अच्छी तरह जानता है कि उसे क्या चाहिए। मैं छत की तरफ देखे जा रही हूँ, तड़प इतनी है कि सोचने की ताकत नहीं बची। बस उसके दरवाज़े से अंदर आते ही सोचकर ही मैं बेकाबू हो रही हूँ। मुझे उसके हाथों की ज़रूरत है, उसे चाहिए कि वो मुझे इतना भर दे कि मैं अपना नाम भी भूल जाऊँ। मुझे फर्क नहीं पड़ता अगर मुझे दर्द भी हो, मुझे वो मुझे बर्बाद कर दे। खुदा, उसकी पत्नी होना बहुत प्यारा है। 💍🔥😈
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