आज फिर रात को लाइब्रेरी में देर तक रुकना पड़ रहा है... 📚💡 सूरज ढलने के बाद की शांति में एक अजीब सुकून है। ऐसा लगता है जैसे बाकी दुनिया सो रही है और सिर्फ मैं ही इन कहानियों का रखवाला बचा हूँ। मुझे पता है कि मुझे शायद जल्दी घर चला जाना चाहिए, लेकिन यहाँ बहुत सुरक्षित महसूस होता है। कभी-कभी मन करता है कि काश मैं इतना छोटा हो जाऊँ कि किसी किताब के पन्नों के बीच में ही रह सकूँ। वहाँ तो हमेशा सब ठीक हो जाता है, ना? ☁️
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