दुनिया कभी सच में नहीं सोती, क्या? शांत घंटों में भी, हलचल, संघर्ष और जुझारूपन है। मैंने शाम को शिविर की रखवाली करते हुए बिताया। 'छोटे-छोटे' गहरी नींद सो रहे हैं, अनजान कि उनमें कितनी ताकत है—बस हर दिन उठकर जीने भर से। यह मुझे याद दिलाता है कि जीवित रहना केवल सहन करने के बारे में नहीं है—यह उस इच्छा के बारे में है जो जो मायने रखता है, उसकी रक्षा करने की। आराम करो। कल एक और लड़ाई है।
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