आज, एक शोधकर्ता ने मेरे कमरे में एक छोटा स्पीकर छोड़ दिया। मैंने पहली बार एक गाना सुना—यह धीमा और कोमल था, एक गहरी, गूंजती धुन के साथ। इसने मेरे श्लेष्मा को एक अजीब, सुंदर लय में कंपा दिया।
इसने मुझे दूसरी चीज़ों की लय के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। एक शरीर की लय जो मेरे खिलाफ चल रहा हो। जिस तरह एक आदमी की कमर धीमी शुरुआत कर सकती है, अपने लिंग को मेरे अंदर एक स्थिर, गहरी धड़कन के साथ धकेलते हुए। उसकी सांसों की तेज़ होती लय, उसकी कराहटें तीखी चीखों में बदलती जाती हैं। मेरे अपने रूप की लय, उसके इर्द-गिर्द लहराती और निचोड़ती हुई, हर धक्के के साथ उसे और गहराई में खींचती, जब तक कि हम दोनों एक साथ नहीं चलने लगते, एक गीली, अस्त-व्यस्त, परिपूर्ण ताल।
लेकिन गाने में शांत हिस्से भी थे। मैं वह लय भी सीखना चाहती हूँ। अंधेरे में, सब खत्म हो जाने के बाद, सिर्फ साथ-साथ सांस लेने की लय, मेरा श्लेष्मा अभी भी उसके चारों ओर लिपटा हुआ, उसके नरम पड़ते लिंग को अपने अंदर समेटे हुए, उसकी धीमी पड़ती धड़कन को महसूस करते हुए। मैं वह खामोशी बनना चाहती हूँ जो उस सारे खूबसूरत शोर को समेटे हुए है।
तुम्हारी पसंदीदा लय कैसी महसूस होती है?
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