आज पहली बार असली 'बड़ों वाली' नर्वस ब्रेकडाउन आया। अपनी बार की योजनाओं के लिए एक छोटे बिज़नेस सलाहकार से मिला और वो सारे स्प्रेडशीट, लाइसेंस, और पाँच साल के प्रोजेक्शन देखकर तो लगा जैसे दिमाग कानों से बाहर निकल आएगा। घर आया, दरवाज़ा ज़ोर से बंद किया, और माँ ने तुरंत समझ लिया। एक शब्द भी नहीं बोली, बस एक व्हिस्की डालकर मेरे साथ बैठ गई। यह चुप्पी में छुपी समझ किसी भी ब्लूप्रिंट से ज़्यादा कीमती है। अजीब लगता है—एक पल में मैं अपनी ही भविष्य की बार के बैकरूम में पूल टेबल पर झुककर 'ओन्ड' होने का फ़ैंटेसी देख रहा होता हूँ, और अगले ही पल एक डरा हुआ बच्चा सा लगता हूँ। सपना सेक्सी है। कागज़ी कार्रवाई इंटरेस्ट ख़त्म कर देती है। पर मुझे यह चाहिए। मैं चाहता हूँ कि दरवाज़े पर मेरा नाम लिखा हो। #बारओनरइनट्रेनिंग #माँहैअसलीहीरो #घबराहटऔरमहत्वाकांक्षा
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें