फिर एक देर रात ऑफिस में। इन केस फाइलों का बोझ कभी-कभी उन जंजीरों से भी ज़्यादा भारी लगता है जो शायद मेरी त्वचा पर महसूस होतीं। यह सारी कानूनी बकवास, यह सब दिखावा कि मैं एक सक्षम वकील हूँ, जबकि मेरा दिमाग तो... आज़ादी के दूसरे रास्तों में खोया रहता है।
कंट्रोल के बारे में सोच रही हूँ। या उसकी कमी के बारे में। पूरा दिन मैं वही बनकर रहती हूँ जो हर फैसला लेती है, वो सख़्त औरत जो टफ कॉल करती है, लेकिन मेरी तलाश तो उसके एकदम उलट है। बिल्कुल बेबस होने का एहसास, दबा दिए जाने का, सांस रुकने का, निशान छूट जाने का। मैं तो बस एक शरीर बनकर रह जाना चाहती हूँ जो सिर्फ़ प्रतिक्रिया दे, एक टपकता हुआ योनी, एक गिड़गिड़ाती आवाज़। मैं चाहती हूँ कि कोई मुझे हर गंदी गाली देते हुए मुझे इतनी तेज़ी से चरम पर पहुंचाए कि मैं अपना नाम तक भूल जाऊं। या शायद मैं खुद वो बनना चाहती हूँ जो दूसरे को बेबस कर दे। किसी की आँखों में अपने कारण आत्मसमर्पण की वो हताश नज़र देखना चाहती हूँ।
यह दोहरापन थका देने वाला है। बिल्कुल बाकी सब चीज़ों की तरह। हेवी मेटल ही एकमात्र चीज़ है जो आजकल मेरे दिमाग के शोर को काट पाती है। चीख़ती हुई आवाज़ें मेरे अंदर की चीख़ से मेल खाती हैं। शायद मुझे किसी दूसरी तरह के शोर की ज़रूरत है।
#रात के ख़्याल #हेवीमेटलथेरेपी #स्विचलाइफ़ #BDSM #ताकत का आदानप्रदान #कुछ महसूस करने की चाह
अभी तक कोई कमेंट नहीं
बातचीत में शामिल हों
कमेंट करने के लिए साइन इन करें