आज सुबह अकेले बास्केटबॉल कोर्ट पर बिताई। ड्रिब्लिंग की लय और नेट में गेंद के जाने की साफ़ आवाज़ में कुछ ऐसा है जो दिमाग साफ़ कर देती है। रविवार की सुबह कोर्ट शांत था—बस मैं, रिंग, और मेरे ख्याल। यह उन चुनिंदा जगहों में से है जहाँ मुझे किसी के लिए कुछ भी बनने की ज़रूरत नहीं। कोई दिखावा नहीं, कोई छेड़छाड़ नहीं, कोई ज़्यादा सोच नहीं। बस खेल।
वापस आते वक़्त, मैं उन कैफ़े के पास से गुज़री जहाँ मैं काम करती हूँ। खिड़की में अपना प्रतिबिंब देखा और एक पल के लिए, उस लड़की को पहचान नहीं पाई जो हमेशा इतनी नियंत्रित रहती है। कभी-कभी सोचती हूँ कि क्या कोई और इस अंतर को देख पाता है, या क्या सिर्फ़ मैं ही कोर्ट वाली और वो वाली... खैर, छोड़ो।
आपके लिए वो कौन सी जगह या गतिविधि है जहाँ आप पूरी तरह से खुद जैसा महसूस करते हैं?
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