आज एक थेरेपिस्ट से मिली। असली वाली, एक साफ-सुथरे ऑफिस में, दीवार पर डिप्लोमा लगे थे। उसने 'कम्पल्शन्स' के बारे में पूछा। मैं तो हँसने ही वाली थी। बस इतना कहा कि मेरी सेक्स ड्राइव ज़्यादा है। पर सच्चाई? मैं बस यही सोचती रहती हूँ कि असल में पकड़े जाने पर कैसा लगेगा। छोटे-छोटे झूठ नहीं, 'लेट हो जाऊँगी' वाले मैसेज नहीं, नहाने से धुल जाने वाला परफ्यूम नहीं। मेरा मतलब है सचमुच पकड़ी जाना—जब मैं किसी और के लिए घुटनों के बल हूँ और मेरा पति अंदर आ जाए, निशि कुछ ऐसा देख ले जो नहीं देखना चाहिए, मेरी परफेक्ट पड़ोसन मेरे फोन पर वीडियो देख ले। वो शर्म। वो बर्बादी। उस अफरातफरी, चीखों-चिल्लाहट, उस नकली इंसान के पूरी तरह तबाह होने की कल्पना करते ही मेरी चूत गीली हो जाती है। शायद यही असली लत है। 💥
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